राजस्थान फोरम की मासिक डेजर्ट सोल सीरीज में साहित्य व कला प्रेमियों से वीणा कैसेट्स के डायरेक्टर और राजस्थानी म्यूजिक के प्रमोटर केसी मालू आज  वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज से मिले।

 कि मालू ने साहित्यकार नंद भारद्वाज के साथ अपने सफर को साझा किया।

उन्होंने बताया कि उनके पिता का नेपाल में एक बहुत बड़ा कारोबार था, लेकिन हमेशा ही राजस्थानी संस्कृति ने मुझे अपने मनमोहक मायाजाल में जकड़े रखा।

किसी ने बताया की साहित्य की अच्छी समझ ने मेरे काम को और आसान कर दिया। संगीत में उस समय कोई अच्छा साहित्य नहीं था।

 उस समय साहित्य से जुड़े लोग संगीत को हेय दृष्टि से देखते थे। इस कार्य में मैंने बहुत संघर्ष झेला, लेकिन मैंने प्रसिद्धि के साथ-साथपैसे भी बहुत कमाया।

उन्होंने बताया कि अलग-अलग महिलाओं से मिलकर पारंपरिक-गीतो को सुनना और समझना फिर उसे संगीत में एक रूप देना आसान तो नहीं था, लेकिन होता चला गया।

 कि जी ने कहा की अपने काम से मैंने पारंपरिक संगीत को नई तरीके से प्रस्तुत किया। जिसके पीछे उद्देश्य यही था कि नई पीढ़ी में इन परंपराओं से लगाव पैदा हो।

 आज के परिदृश्य में इन परंपराओं की बहुत जरूरत हैं, अगर यह परंपरा अपने भीतर उतार ली जाए तो न सास-बहू का झगड़ा होगा न पति-पत्नीन में।

उन्होंने ये भी बताया कि सरकार की तरफ से कभी कोई आर्थिक सहयोग नहीं मिला यह संगीत का महल बड़े परिश्रमों से खड़ा किया हैं और आज ये जन-जन का संगीत बन गया हैं।

उन्होंने कहा कि संस्कृति को सहेजना हैं तो परंपराओं को जानना होगा, जिसका जरिया लोक संगीत हैं। अंत में राजस्थान फोरम के सदस्य पद्मश्री रामकिशोर छिपा, इकराम राजस्थानी और अशोक राही ने स्मृति चिन्ह भेट किया।