Siddha Kunjika Stotra Hindi PDF | पढ़े सिद्ध कुन्जिका स्तोत्रं

Siddha Kunjika Stotra | सिद्ध कुन्जिका स्तोत्रं :- नमस्कार दोस्तों अगर आप सिद्ध कुंजिका स्त्रोत पाठ का डायरेक्ट वीडियो फ्री डाउनलोड करना चाहते हैं तो आप हमारे इस पोस्ट के नीचे दिए गए डाउनलोडिंग से सीधा वीडियो फाइल को डाउनलोड कर सकते हैं

Siddha Kunjika Stotra में माता जी के गुण गुणों का वर्णन किया गया है यह मंत्र बहुत ही प्रभावशाली मंत्र माना जाता है अगर आप मां दुर्गा जी का सप्तशती का पाठ जो नहीं कर पाते हैं वह सिद्ध कुंजिका स्त्रोत पढ़कर मां दुर्गा जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं मां दुर्गा सप्तशती पाठ को पढ़ने में आपको कम से कम 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है और आपके पास अगर समय नहीं है तो आप सिद्ध कुंजिका स्त्रोत भी मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं |

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मां दुर्गा जी का यह सिद्ध कुंजिका स्त्रोत जो सच्ची श्रद्धा के साथ पाठ करता है उसके सारे दुखों का नाश तो होता ही है साथ ही साथ उसके रुके हुए काम भी बनाने लगते हैं सिद्ध कुंजिका स्त्रोत को आप रोजाना पढ़ सकते हैं और अगर आप कोई कारण वंश नहीं पढ़ सकते हैं तो आपको कम से कम नवरात्र में Siddha Kunjika Stotra का पाठ करना चाहिए नवरात्रा के समय आप इस पाठ को सुबह-शाम दोनों वक्त कर सकते हैं एसे करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है |

Siddha Kunjika Stotra
Siddha Kunjika Stotra

सिद्ध कुन्जिका स्तोत्रं फाइल की जानकारी | Siddha Kunjika Stotra PDF file Details

Name of the PDF Fileसिद्ध कुन्जिका स्तोत्रं
PDF File Size1.02 MB
CategoriesReligious
BeneficiaryFor All People
SourcePDFHIND.COM
ModeOnline/Offline
Uploaded on24-03-2022
PDF LanguageHINDI
सिद्ध कुन्जिका स्तोत्रं

महान ऋषि मुनियों और विद्वान पंडितों का कहना है कि अगर जो कोई सच्चे मन से मां दुर्गा जी का सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का नित्य पाठ करता है तो उसको परमसुख घर में सारी सुख सुविधाएं और सभी प्रकार के दुखों का नाश होता है और वह हमेशा खुस रहता है तो दोस्तों अगर आप भी इन सब चीजों का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपको सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ रोजाना सुबह या शाम को कर सकते हैं आप को यह पाठ करने से पहले अपने आप को शुद्ध करके पाठ करना होता है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर आप सच्चे मन से माता दुर्गा जी को याद करते हैं तो आपको अच्छा और बेहतर परिणाम मिलेगा |

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत के रहस्य के बारे में जाने

  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत के बारे में मोहन ऋषि-मुनियों और पंडितों को का कहना है
  • कि सिद्ध कुंजिका स्त्रोत रुद्रयामल तंत्र से इसका विकास हुआ था
  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत भगवान शिव जी ने माता पार्वती को अकेले में बताया था
  • श्री कुंजिका स्त्रोत आपको दुर्गा सप्तशती पाठ करने से पहले करना चाहिए
  • अगर आप सिद्ध कुंजिका स्त्रोत बिना पढ़ें सीधा दुर्गा सप्तशती पाठ को पढ़ते हैं
  • तो यह निष्फल माना जाता है
  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ आप रोज कर सकते हैं
  • मेघनाद ने लक्ष्मण जी के सामने जीतने के लिए उन्होंने एकांत में इस पाठ को किया था

How to do Siddha Kunjika Stotra Path |सिद्ध कुंजिका स्त्रोत पाठ कैसे करे

  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ आप सुबह शाम किसी भी वक्त कर सकते हैं
  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ अगर आप शाम के समय कर सकते है
  • फिर रात्रि 11:00 से 1:00 के बीच में करते हैं तो यह बहुत ही लाभदायक माना जाता है
  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करने से पहले आपको कुछ महत्वपूर्ण बातों की ध्यान रखना जरूरी है
  • जैसे कि सबसे पहले आपको मंदिर या पूजा के स्थान को साफ सुथरा रखना है
  • उसके बाद माता दुर्गा जी की मूर्ति स्थापित करें
  • स्थापित कर देने के बाद पूजा सामग्री तैयार करें
  • पूजा सामग्री में भी दीपक, बाती, रोली, पानी के लिए कलश और प्रसाद आदि लेकर अपना आसन ग्रहण करें
  • अगर आप लाल वस्त्र धारण करके कुंजिका स्त्रोत का पाठ करते हैं तो यह और भी ज्यादा बेहतर होता है
  • पाठ करते वक्त ध्यान रखें आपको सच्चे मन से पाठ करना है
  • इसी प्रकार आप सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ संपूर्ण कर सकते हैं

Siddha Kunjika Stotra
Siddha Kunjika Stotra

Benefits of Siddha Kunjika Stotra Path | सिद्ध कुंजिका स्त्रोत के लाभ जाने

  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करने से मनुष्य की चल रही समस्याओं का समाधान हो सकता है
  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत के पाठ करने से व्यक्ति को आत्मा विश्वास और बल बुद्धि में विकास होता है
  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करने से मन में शांति और प्रेरणा का भाव बना रहता है
  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करने से पॉजिटिव एनर्जी सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
  • शिव कुंजिका स्त्रोत का पाठ करने से आपके बिगड़े काम बनाने लगते हैं
  • अगर कोई काम में बाधा आ रही है तो वह काम भी बनने लगते हैं
  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करने से आप पर कोई बुरी शक्ति का प्रभाव नहीं होता है
  • सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करने से आपको माता जी का आशीर्वाद मिलता है

Siddha Kunjika Stotra Path | सिद्ध कुंजिका स्त्रोत पाठ पढ़े

शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥१॥
हे देवी !सुनो। मैं उत्तम सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का उपदेश प्रदान करूँगा,
जिस मन्त्र के प्रभाव से देवी का पाठ सफल होता है ।।१।।
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥

कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास
यहाँ तक कि अर्चन भी आवश्यक नहीं है ।।२।।
कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥३॥

केवल कुंजिका के पाठ से दुर्गापाठ का फल प्राप्त हो जाता है।
(यह कुंजिका) अत्यंत गुप्त और देवों के लिए भी दुर्लभ है ।।३।।
गोपनीयं प्रयत्‍‌नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥४॥

हे देवी पार्वती ! स्वयोनि की भांति प्रयत्नपूर्वक गुप्त रखना चाहिए।
यह उत्तम कुंजिकास्तोत्र केवल पाठ के द्वारा
मारण, मोहन, वशीकरण, स्तम्भन और उच्चाटन आदि
उद्देश्यों को सिद्ध करता है ।।४।।
॥अथ मन्त्रः॥
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥

मन्त्र -ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय
ज्वल ज्वलप्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं
चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ।।
॥इति मन्त्रः॥
नमस्ते रूद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥१॥

हे रुद्ररूपिणी ! तुम्हे नमस्कार।
हे मधु दैत्य को मारने वाली !
तुम्हे नमस्कार है। कैटभविनाशिनी को नमस्कार।
महिषासुर को मारने वाली देवी ! तुम्हे नमस्कार है ।।१।
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरूष्व मे॥२॥

शुम्भ का हनन करने वाली और
निशुम्भ को मारने वाली ! तुम्हे नमस्कार है ।।२।।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते॥३॥

हे पार्वती महादेवी ! मेरे जप को जाग्रत और सिद्ध करो।
‘ऐंका ऐं र’ के रूप में सृष्टिरूपिणी,
‘ह्रीं’ ह्रीं के रूप में सृष्टि का पालन करने वाली ।।३।।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥४॥

क्लीं के रूप में कामरूपिणी (अखिल ब्रह्माण्ड) की बीजरूपिणी देवी !
तुम्हे नमस्कार है। चामुंडा के रूप में तुम चण्डविनाशिनी
और ‘यैकार’ के रूप में वर देने वाली हो ।।४।।
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्‍‌नी वां वीं वूं वागधीश्‍वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥५॥

‘विच्चे’ रूप में तुम नित्य ही अभय देती हो।
(इस प्रकार ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) तुम इस मन्त्र का स्वरुप हो ।।५।।
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥६॥

‘धां धीं धूं’ के रूप में धूर्जटी ( शिव ) की तुम पत्नी हो।
‘वां वीं वूं’ के रूप में तुम वाणी की अधीश्वरी हो।
‘क्रां क्रीं क्रूं’ के रूप में कालिकादेवी,
‘शां शीं शूं’ के रूप में मेरा कल्याण करो ।।६।।

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं।
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥७॥

‘हुं हुं हुंकार’ स्वरूपिणी, ‘जं जं जं’ जम्भनादिनी, ‘भ्रां भ्रीं भ्रूं’ के रूप में हे
कल्याणकारिणी भैरवी भवानी ! तुम्हे बार बार प्रणाम ।।७।
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे॥८॥

‘अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं धिजाग्रं धिजाग्रं’
इन सबको तोड़ो और दीप्त करो, करो स्वाहा।
‘पां पीं पूं’ के रूप में तुम पार्वती पूर्णा हो।
‘खां खीं खूं’ के रूप में तुम खेचरी (आकाशचारिणी) अथवा खेचरी मुद्रा हो।।८।।
इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥
यस्तु कुञ्जिकाया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥

‘सां सीं सूं’ स्वरूपिणी सप्तशती देवी के मन्त्र को मेरे लिए सिद्ध करो।
यह सिद्ध कुंजिका स्तोत्र मन्त्र को जगाने के लिए है।
इसे भक्तिहीन पुरुष को नहीं देना चाहिए।
हे पार्वती ! इस मन्त्र को गुप्त रखो।
हे पार्वती देवी ! जो बिना सिद्ध कुंजिका के सप्तशती का पाठ करता है
उसे उसीप्रकार सिद्धि नहीं मिलती जिस प्रकार वन में रोना निरर्थक होता है।
इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम्।

Siddha Kunjika Stotra

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ कब करना चाहिए ?

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ 8 आप दिन में किसी भी वक्त कर सकते हैं लेकिन अगर आप शाम के समय सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करते हैं तो यह ज्यादा लाभकारी माना जाता है सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करते वक्त आप को लाल वस्त्र धारण करना चाहिए

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत को पढने से क्या लाभ मिलते है ?

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत का पाठ करने से मनुष्य की चल रही समस्याओं का समाधान हो सकता है, आत्मा विश्वास और बल बुद्धि में विकास होता है, शांति और प्रेरणा का भाव बना रहता है और बिगड़े काम बनाने लगते हैं आदि लाभ मिलते है |

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत को दिन में कितनी बार पढना चाहिय ?

सिद्ध कुंजिका स्त्रोत को आप दिन में दो बार पढ़ सकते है और अगर आप दो बार पढना Possible नहीं है तो आप शाम के समय सच्चे मन से करे | याद रखे पाठ करते समय आप को बिच में बोलना और उठाना नहीं चाहिय |

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