Sharad purnima vrat katha pdf 2022 | शरद पूर्णिमा व्रत कथा इन हिंदी पीडीएफ

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आज 09/10/2022 को शरद पूर्णिमा का त्योंहार है | इसे कुमारा पूर्णिमा, कोजागिरी पूर्णिमा, नवन्ना पूर्णिमा, कोजाग्रत पूर्णिमा या कौमुदी पूर्णिमा आदि नामों से भी जाना जाता है | इस लेख में आपको शरद पूर्णिमा की सम्पूर्ण व्रत कथा एवं इससे पीडीऍफ़ में डाउनलोड करने का लिंक भी उपलब्ध है |

PDF FILE NAMESharad purnima vrat katha pdf
SIZE616 KB
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SOUCEhttps://pdfhind.com
DATE 09-10-2022 (Sunday)
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शरद पूर्णिमा शुभ मुहर्त एवं डेट | Sharad Purnima Date and Muhart 2022

हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा माना जाता है | 2022 में अक्टूबर महीने की 9 तारीख को शरद पूर्णिमा है | चलिए इस दिन के मुहर्त के बारे में जानते है –

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ का समय – अक्टूबर 09, 2022 को 03:41 AM
पूर्णिमा तिथि समाप्त का समय – अक्टूबर 10, 2022 को 02:24 AM
शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय का समय – 05:51 PM

शरद पूर्णिमा शुभ मुहर्त

Sharad purnima vrat katha pdf 2022 in Hindi | शरद पूर्णिमा की व्रत कथा

शरद पूर्णिमा के एक प्रशिद्ध कथा है: एक कथा के अनुसार एक साहुकार को दो पुत्रियां थीं। दोनो पुत्रियां पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। लेकिन बड़ी पुत्री पूरा व्रत करती थी और छोटी पुत्री अधूरा व्रत करती थी, उसका मन पूजा पाठ में कम लगता था। इसका नतीजा यह हुआ कि छोटी पुत्री की संतान पैदा होते ही मर जाती थी।

उसने पंडितों एवं विद्वान् जनों से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती हो एवं पूजा पाठ में मन नहीं लगाती, इसलिए तुम्हारी संतान पैदा होते ही मर जाती है।

पंडितों ने बताया कि अगर तुम पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक करने लगो तो तुम्हारी संतान जीवित रह सकती है। उसने पंडितों की सलाह पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक किया। बाद में उसे एक लड़का पैदा हुआ। जो कुछ दिनों बाद ही फिर से मर गया। उसने लड़के को एक पाटे (पीढ़ा) पर लेटा कर ऊपर से कपड़ा ढंक दिया।

फिर बड़ी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पाटा दे दिया। बड़ी बहन जब उस पर बैठने लगी जो उसका घाघरा बच्चे का छू गया।

बच्चा घाघरा छूते ही रोने लगा। तब बड़ी बहन ने कहा कि तुम मुझे कलंक लगाना चाहती थी। मेरे बैठने से यह मर जाता। तब छोटी बहन बोली कि यह तो पहले से मरा हुआ था। तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है। तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है। शरद पूर्णिमा की दया से ही यह जीवित हुआ है |

इस चमत्कार को देख कर उन्होंने नगर में उसने पूर्णिमा का पूरा व्रत करने का ढिंढोरा पिटवा दिया।

शरद पूर्णिमा की कथा

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शरद पूर्णिमा व्रत विधि 2022 | Sharad Purnima Vrat Vidhi

शरद पूर्णिमा व्रत निम्न विधि अनुसार किया जाता है –

  1. शरद पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठे अर्थात ब्रह्म मुहर्त में उठने का संकल्प लें |
  2. सुबह जल्दी उठकर पवित्र तलाब या नदी में स्नान करें |
  3. नहाने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें |
  4. इस दिन अपने इष्ट देवता का व्रत रखें |
  5. अब पाटे पर विष्णु देवता एवं लक्ष्मी माँ की मूर्ति रखें |
  6. पूजा का स्थान पूर्णत: साफ़ सुथरा होना चाहिए |
  7. अब भगवान की मूर्ति के सामने घी का दीया जलाएं |
  8. माँ लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु के समक्ष लाल एवं पीले रंग के फुल रखें |
  9. सफ़ेद एवं पीले रंग की मिठाई से भोग लगायें |
  10. अब शरद पूर्णिमा की व्रत कथा सुने

निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप शरद पूर्णिमा व्रत कथा की पीडीऍफ़ फाइल डाउनलोड कर सकते है | यह इंस्टेंट डाउनलोड लिंक है जिसपर क्लिक करते है आपका डाउनलोड स्टार्ट हो जायेगा |

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