[PDF] Sankat Nashana Ganesha Stotram in Sanskrit PDF Download | शंकट नाशना गणेश स्तोत्रं संस्कृत में हिंदी अनुवाद सहित

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Sankat Nashana Ganesha Stotram
Sankat Nashana Ganesha Stotram

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शंकट नाशना गणेश स्तोत्रं पीडीऍफ़ फाइल की जानकारी | Sankat Nashana Ganesha Stotram file Details

Name of the PDF FileSankat Nashana Ganesha Stotram
PDF File Size3.08 MB
CategoriesReligious
SourcePDFHIND.COM
Uploaded on09-04-2022
PDF LanguageHINDI & SANSKRIT
शंकट नाशना गणेश स्तोत्रं

Sankat Nashana Ganesha Stotram क्या है

संकट नाशक गणेश स्त्रोत को गणपति स्त्रोत के नाम से भी जाना जाता है गणपति स्त्रोत कुल 8 श्लोको से मिलकर बना है जिसमें भगवान श्री गणेश जी के 12 नाम का गुणगान किया गया है इस संकट नाशक गणेश स्त्रोत का उल्लेख है नारद पुराण में है जोकि बहुत ही शक्तिशाली स्त्रोत कहलाता हैं | ऐसी कहा जाता है कि जो कोई व्यक्ति गणपति स्त्रोत को नियमित रूप से कम से कम 6 महीने तक का पाठ करता है तो उसको मनवांछित फल मिलता है

साथ ही साथ के घर में खुशियों का माहौल बना रहता है और भगवान श्री गणपति महाराज का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है वैसे तो आपको पता ही है गणपति महाराज बुद्धि और विद्या के देवता तो है ही साथ-ही-साथ विघ्नहर्ता भी कहलाते है जो कि अपने भक्तों के दुख को हर लेते हैं और उनको सुखद जीवन जीने का आशीर्वाद देते हैं | अगर आप भी भगवान श्री गणेश जी का आशीर्वाद लेना चाहते हैं तो आपको भी संकटनाशक गणेश स्त्रोत पाठ करना चाहिए इस पाठ को पढ़कर आपकी लाइफ में काफी बदलाव आ सकता है |

कितने दिनों तक करे संकट नाशक गणेश स्त्रोत पाठ

संकट नाशक गणेश स्त्रोत पाठ को कम से कम 6 महीने तक करना चाहिए लेकिन कोई कारण वंश आप 6 महीने तक श्री संकट नाशक गणेश स्त्रोत का पाठ नहीं कर पाते हैं तो आपको कम से कम 21 दिन तक सुबह शाम इस पाठ को करना चाहिए | जिससे आपके जीवन में सभी संकटों का नाश हो सके और आपको गणेश महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हो सके |

वैसे तो अगर आप प्रत्येक बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन है श्री संकट नाशन गणश स्त्रोत का पाठ करते हैं तो आपको श्री गणेश का आशीर्वाद मिल सकता है लेकिन याद रखें आप को कम से कम 21 दिनों तक इसका पाठ है नियमित रूप से करना है आप इस पाठ को करते वक्त बीच में उठना नहीं होता है ना ही बोलना होता है पाठ को पूर्ण करके ही आप अपना दूसरा कोई काम करें |

शंकट नाशना गणेश स्तोत्रं
शंकट नाशना गणेश स्तोत्रं

कैसे करे गणपति स्तोत्रं पाठ | भगवान श्री गणेश जी को कैसे प्रसन्न करे जाने

  • सबसे पहले आप को सुबह जल्दी उठाना है
  • जल्दी उठ कर अपना नित्य क्रिया कर स्नान कर ले
  • उस के बाद आप सवच्छ कपडे पहने और पाठ करने की तैयारी करे
  • आप को मंदिर या पूजा के स्थान पर भगवान श्री गणेश जी की तस्वीर को गंगा जल या साफ पानी से सुध करे
  • उसके बाद आप को पूर्व दिशा में मुह कर के पूजा पाठ करना होता है
  • पाठ को आप पानी इच्छा अनुसार कर सकते है जैसे की 1/3/5/7/11/21/51/108
  • पाठ को पूर्ण कर के आप श्री गणेश जी के अपनी इच्छा रख सकते है
  • उस के बाद आप पूजा में रखे जल को पाने परिवार के सभी सदस्यों को प्रशाद के तोर पर दे
  • बाकि बचा जल से आप अपने घर को सुध करे

Sankat Nashana Ganesha Stotram in Sanskrit With Hindi Mening | शंकट नाशना गणेश स्तोत्रं संस्कृत में हिंदी अनुवाद सहित

ॐ श्री गणेशाय नमः
|| नारद उवाच ||
प्रणम्य शिरसा देवं गौरींपुत्रं विनायकम् |
भक्तावासं स्मरे न्नित्यंमायुः कामार्थसिद्धये || 1
गौरी पुत्र विनायक जी को हम सर्वप्रथम शीश झुका कर प्रणाम करते हैं। श्री गणेश जी जो श्री गौरी जी के पुत्र हैं और विनायक हैं।
जो (श्री गणेश जी ) सदैव भक्तों के हृदय में निवास करते हैं और जिन्हें सदैव ही स्वस्थ जीवन, लम्बी आयु एंव इच्छाओ की (मनोकामना) की पूर्ति के लिए याद किया जाता है।

प्रथमम् वक्रतुण्डम् च एकदन्तम् द्वितीयकम् |
तृतीयम् कृष्ण पिंगक्षम् च गजवक्त्रं चतुर्थकम् || 2 ||

हम श्री गणेश जी के समक्ष सीश नवाते हैं जिनका प्रथम नाम वक्रतुंड (जिनकी सुन्ड में घुमाव है ) है तथा श्री गणेश जी का दुसरा नाम एकदंत है।
श्री गणेश जी जगत में तृतीय नाम कृष्ण पिंगाक्ष (गहरी भूरी आँखें ) हैं और चतुर्थ नाम गजवक्त्रं (हाथी के समान मुख ) है।

लंबोदरम् पंचमं च षष्ठम विकटमेव च |
सप्तमं विघ्नराजेंद्रम् च धूम्रवर्णम् तथाष्टमम || 3 ||

श्री गणेश जी का पंचम नाम लबोदर है (लम्बी उदर, मोटे पेट वाले ) और छठा नाम विकटमेव ( विशाल शरीर ) है।
श्री गणेश जी का सातवा नाम विघ्नराजेन्द् (विघ्न और संकट को दूर करने वाला ) है और अष्ठम नाम धूम्रवर्णं (गहरा स्लेटी रंग वाले ) है।

नवमं भालचंद्रम् च दशमं तु विनायकम् |
एकादशम् गणपतिम् द्वादशम् तु गजाननम् || 4 ||

श्री गणेश जी नौवे रूप में भालचंद्र (जिनके मस्तक पर चन्द्र शोभित है ) के नाम से और दसवे रूप में विनायकम ( समस्त संकटों को हटाने वाले ) हैं।
ग्यारहवे रूप में श्री गणेश जी गणपति हैं (मंगल करने वाले सभी गणों के प्रमुख ) और बारहवे रूप में गजाननं ( हाथी के सर वाले ) हैं।

द्वादशएतानि नामानि त्रिसंध्यम यः पठेन्नरः |
न च विघ्नभ्यम् तस्य सर्वसिद्धि करं प्रभो || 5 ||

श्री गणेश जी के अभिवादन के साथ की यदि कोई श्री गणेश जी के इन बारह रूपों का दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को बोलता है
(प्रभु श्री गणेश जी को याद करता है ) उसे इस जीवन में किसी भी प्रकार का कोइ भय और बाधा नहीं आती है और श्री गणेश जी की कृपा से सभी मनोवांछित कामनाएं पूर्ण होती है।

विध्यार्थी लभते विद्याम धनार्थी लभते धनम् |
पुत्रार्थी लभते पुत्रान मोक्षार्थी लभते गतिम् || 6 ||

भगवान् श्री गणेश जी इन बारह नामो को जो भी हृदय से उच्चारित करता है वह यदि ज्ञान प्राप्त करना चाहता है तो उसे ज्ञान की प्राप्ति होती है और यदि वह वैभव, धन की प्राप्ति करना चाहता है
तो उसकी मनो कामना पूर्ण होती है। इसके साथ ही जो जातक पुत्र प्राप्ति की इच्छा करते हैं उन्हें पुत्र की प्राप्ति होती है
और जो साधक मोक्ष प्राप्ति की कामना करता है उसे इस जीवन मरण के फेर से मुक्ति मिलती है।

जपेद गणपति स्तोत्रम् षडभिमासैः फलम् लभते |
संवत्सरेण सिद्धि चं लभते नात्र संशयः || 7 ||

यदि साधक छह महीने तकनिर्बाध रूप से श्री गणेश जी भगवान् के उपरोक्त बारह रूपों का मनन करे और इनका उच्चारण करे तो फल प्राप्त होना शुरू हो जाता है।
एक वर्ष तक ऐसा करने से फल की प्राप्ति अवश्यम्भावी होती है जिसमे किसी प्रकार का कोई भी शंशय नहीं होता है।

अष्टाभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां यः समर्पयेत |
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः || 8 ||

इसे आठ ब्राह्मणों को समर्पित और इसके उपरान्त श्री गणेश जी की कृपा से सभी ज्ञान की प्राप्ति होती है।

|| इति श्री नारदपुराणे संकष्टनाशनं स्त्रोत्रम् सम्पूर्णम् ||

Sankat Nashana Ganesha Stotram

Sankat Nashana Ganesha Stotram in English

|| Narad Uvaach ||
Pranamya shirasa devam Gauri putram Vinayakam ।
Bhakthavasam smaretrityamayuh kama artha sidhaye ॥1॥

Prathamam Vakratundam cha, Ekadantam dwitiyakam ।
Tritiyam Krushna Pingaksham, Gajavaktram Chaturthakam ॥2॥

Lambodaram Panchamam cha, Sashtam Vikatamev cha ।
Saptamam Vignarajam cha, Dhoomravarnam tathashtamam ॥3॥

Navamam Bhalchandram cha, Dashamam tu Vinayakam ।
Ekadasham Ganapatim, Dwadasham tu Gajananam ॥4॥

Dwadasaithani namani, Trisandhyam yah pathenara ।
Na cha vighna bhayam tasya, Sarvsiddhi karam param ॥5॥

Vidhyarthi labhate Vidhyam, Danarthi labhate Dhanam ।
Putrarthi labhate Putran, Moksharthi labhate Gateem ॥6॥

Japet Ganapati stotram, Shadbhirmasai phalam labheth ।
Samvatsarena sidhim cha, Labhate natra sanshaya ॥7॥

Ashtabhyo Brahmoyashr Likihitwa yh samarpayet ।
Tasya Vidhya bhavetsarva Ganeshasya Prasadatah ॥8॥

शंकट नाशना गणेश स्तोत्रं

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