[PDf] Saraswati Chalisa | माँ सरस्वती चालीसा लिरिक्स पीडीऍफ़ डाउनलोड

Saraswati Chalisa : नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में हम मां सरस्वती चालीसा (Saraswati Chalisa)का पाठ लेकर आए हैं |तो आप यहां पर मां सरस्वती चालीसा का संपूर्ण पाठ पढ़ सकते हैं | और नीचे गई दिए गए डाउनलोड लिंक से मां सरस्वती चालीसा(Saraswati Chalisa) लिरिक्स का पीडीएफ फाइल डाउनलोड कर सकते हैं हम आपको यहां पर मां चालीसा के फायदे और पाठ करने की विधि के बारे में भी बताएंगे|

दोस्तों आपको पता ही है माँ सरस्वती जी का जन्म भगवन विष्णु जी के मूख से हुआ था | माता जी का पसंदीदा वाद्य यन्त्र गिटार है | मां सरस्वती जी को ज्ञान की देवी के रूप में पूजा जाता है | स्कूल में सुबह जाते ही प्रार्थना करवाई जाती है वह प्रार्थना भी मां सरस्वती की ही होती है क्योंकि मां सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा जाता है |

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती जी की पूजा करना उनका चालीसा आरती का पाठ करना बेहद ही सकारात्मक प्रभाव देता है | और सरस्वती देवी मां भी खुश हो जाती है मां सरस्वती को प्रसन्न करके आपको सद्बुद्धि, ज्ञान, विवेक की प्राप्ति हो सकती है | आपके आने वाले कल आपके लिए बेहतर साबित होगा तो आपको मां सरस्वती जी की आरती और चालीसा का पाठ करना चाहिए जिससे मां का आशीर्वाद बना रहे |

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 Saraswati Chalisa

माँ सरस्वती चालीसा का पीडीऍफ़ फाइल की जानकारी | Saraswati Chalisa file Details

Name of the PDF FileSaraswati Chalisa | (माँ सरस्वती चालीसा)
PDF File Size4.7 MB
CategoriesReligious
SourcePDFHIND.COM
Uploaded on02-12-2021
PDF LanguageHINDI & SANSKRIT

कैसे करें मां सरस्वती चालीसा पाठ | How to do Saraswati Chalisa

  • माताजी के चालीसा(Saraswati Chalisa) का पाठ करने के लिए आप को पहले सुबह जल्दी उठकर नित्य क्रिया करके स्नान करे
  • बाद में साफ-सुथरे कपड़े या नये कपडे पहने और माला पहन भी पहन सकते है |
  • इसके बाद मां सरस्वती जी की प्रतिमा या फोटो को साफ करें और अपनी पूजा सामग्री तैयार करें |
  • अब माता सरस्वती जी की आरती और उसके बाद माता सरस्वती जी का चालीसा का पाठ जरूर करें
  • मां चालीसा(Saraswati Chalisa) का पाठ करने के बाद प्रसाद वितरण करें और खुद भी प्रसाद ले

मां सरस्वती चालीसा को पढ़ने के फायदे | Benefit of Saraswati chalisa

  • सरस्वती चालीसा का पाठ करने से ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है पढ़ाई में मन लगता है यह विद्यार्थियों के लिए बहुत ही फायदेमंद है मां चालीसा का पाठ|
  • मां चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति बुद्धिमान बनता है और किए गए बुरे कर्मो के प्रभाव से बच पाता है|
  • माँ सरस्वती का पाठ करने से मनुष्य अपने मार्ग से विचलित नहीं होता है |
  • माँ सरस्वती जी के चालीसा का पाठ करने से संतान का सुख प्राप्त कर सकते है |
  • चालीसा का पाठ करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है।
  • चालीसा पाठ करने से शिव की कृपा से सिद्धि-बुद्धि, धन-बल और ज्ञान-विवेक की प्राप्ति होती है।
  • चालीसा का पाठ करने से स्मरणशक्ति और अपने आप में आत्मविश्वास बढ़ता है |
  • चालीसा पाठ करने से वो हर तरह के सुख का भागीदार बनता है।
  • चालीसा के पाठ करने से हमरे शरिर में एक सकारात्मक उर्जा मिलती है | 

माँ सरस्वती चालीसा सम्पुर्ण पाठ | Maa Saraswati Chalisa Path

॥ दोहा ॥
जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।
दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥

॥ चालीसा ॥
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।
जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥
जय जय जय वीणाकर धारी।
करती सदा सुहंस सवारी॥

रूप चतुर्भुज धारी माता।
सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती।
तब ही धर्म की फीकी ज्योति॥

तब ही मातु का निज अवतारी।
पाप हीन करती महतारी॥
वाल्मीकि जी थे हत्यारा।
तव प्रसाद जानै संसारा॥

रामचरित जो रचे बनाई।
आदि कवि की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता।
तेरी कृपा दृष्टि से माता॥

तुलसी सूर आदि विद्वाना।
भये और जो ज्ञानी नाना॥

तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा।
केव कृपा आपकी अम्बा॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी।
दुखित दीन निज दासहि जानी॥

पुत्र करहिं अपराध बहूता।
तेहि न धरई चित माता॥
राखु लाज जननि अब मेरी।
विनय करउं भांति बहु तेरी॥

मैं अनाथ तेरी अवलंबा।
कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
मधुकैटभ जो अति बलवाना।
बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना॥

समर हजार पाँच में घोरा।
फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा॥
मातु सहाय कीन्ह तेहि काला।
बुद्धि विपरीत भई खलहाला॥

तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।
पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता।
क्षण महु संहारे उन माता॥

रक्त बीज से समरथ पापी।
सुरमुनि हदय धरा सब काँपी॥
काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा।
बारबार बिन वउं जगदंबा॥

जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा।
क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा॥
भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई।
रामचन्द्र बनवास कराई॥

एहिविधि रावण वध तू कीन्हा।
सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा॥
को समरथ तव यश गुन गाना।
निगम अनादि अनंत बखाना॥

विष्णु रुद्र जस कहिन मारी।
जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी।
नाम अपार है दानव भक्षी॥

दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।
दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
दुर्ग आदि हरनी तू माता।
कृपा करहु जब जब सुखदाता॥

नृप कोपित को मारन चाहे।
कानन में घेरे मृग नाहे॥
सागर मध्य पोत के भंजे।
अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥

भूत प्रेत बाधा या दुःख में।
हो दरिद्र अथवा संकट में॥
नाम जपे मंगल सब होई।
संशय इसमें करई न कोई॥

पुत्रहीन जो आतुर भाई।
सबै छांड़ि पूजें एहि भाई॥
करै पाठ नित यह चालीसा।
होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा॥

धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै।
संकट रहित अवश्य हो जावै॥
भक्ति मातु की करैं हमेशा।
निकट न आवै ताहि कलेशा॥

बंदी पाठ करें सत बारा।
बंदी पाश दूर हो सारा॥
रामसागर बाँधि हेतु भवानी।
कीजै कृपा दास निज जानी।

॥ दोहा ॥
मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप।
डूबन से रक्षा करहु परूँ न मैं भव कूप॥
बलबुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु।
राम सागर अधम को आश्रय तू ही देदातु॥

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